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Hymn No. 2938 | Date: 04-Mar-2005
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तेरी दुनिया में हम कौन, हम कौन, न ही कोई हमारी है बिसात।
तेरी दुनिया में हम कौन, हम कौन, न ही कोई हमारी है बिसात।
पल पल जपूं जो तेरा नाम, तो भी कर नहीं सकता तुझसे फरियाद।
ये हस्ती जो टिकी है तेरी कृपा पे, फूट जाये न जाने कब जो तेरी दया न हो।
दिल से सलाम, मन से सलाम, तेरी इनायत के वास्ते तन के रोम रोम से पल पल सलाम।
खाकसार जो सिजदा करे तो मायने नही, सिजदा जो मय्यसर है तेरी रजा से।
ऐसा न है हमने चाहा नहीं, पर पल भर को तुझको नजरों से हटते पाया नहीं खुदको कहीं।
जो भी कहो ओ यारो तुम मुझे, वो सब सही, जो हस्ती में नहीं तो कहीं भी नही।
तौबा तौबा हर उस बात से मालिक जो तेरे सिवाय याद दिलाये पल भरको मुझे मेरी।
तेरे प्यार के कसीदे हो इतने लंबे, पढ़ने के वास्ते कम पड़ जाये जन्मों जन्मकी श्वास मेरी।
इस डगर हो या उस डगर जाना हो जो किसी भी डगर पे, सफर के हर पल में जो हो तू पल पल।


- डॉ.संतोष सिंह