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My Divine Blessing
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Hymn No. 2939 | Date: 17-Mar-2005
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यों जब गुजरेगी जिंदगी, तब रास न आयेगी बंदगी।
यों जब गुजरेगी जिंदगी, तब रास न आयेगी बंदगी।
पाया हुआ खो जायेगा, हाथ आया हुआ साथ छोड़ जायेगा।
तलाश में जो न था वो भी मिला, पर सहेजना न जाना हमने।
तदबीर क्यों ऐसी है, जो बदल न सके तकदीर मेरी,
तब तक भी ठीक था, जो अनायास मिला गंवाया तदबीर के चलते।
रहनुमां तू मेरा एक है सदा से, कैसे चले तदबीर की मेरी तेरे आगे।
लुटा चुका हूँ अपने आप को, किसी ओर से बचा न है कुछ।
मौला भरने के लिये न कहता हूँ, भ्रम तोड़ दे तू मेरे मनका,
मन के हर कुचक्र से निकलकर दंड़वत हो जाऊँ तेरे चरणों में।
- डॉ.संतोष सिंह
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