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Hymn No. 2942 | Date: 17-Mar-2005
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तुम्हारी मर्जी हर बात मैं है, दुनिया का हो चाहे कोई छोर।
तुम्हारी मर्जी हर बात मैं है, दुनिया का हो चाहे कोई छोर।
हिले न कोई पता मर्जी के बिना तेरी, तुम्हारी मर्जी हर बात मैं है।
अच्छा हो या बुरा, निभाते हैं हर कोई अपना किया।
चाहके कोई पलट न सके, किस्मत के जोर पे जो गुजरता हो जीवन।
मजे की बात है ये, अपने नियम में बांध रखा है तूने खुदको।
जब जब आये धरा पे तू, तो निभाया अपनी बनायी रस्मों को।
महज तेरी कृपा है जो तोड़े हर उसूलों को, तेरी दया पे रहते है रसूल।
चाहतों का क्या वो तो अंजाम देते है ख्वाबों को हकीकत मैं।
मुझ जैसे कि फरियाद तेरी कृपा से फूलते फलते है।
वख्त बीती जाये, बीती जाये जिंदगी, बीतने से पहले कर दे कृपा तू अपनी।


- डॉ.संतोष सिंह