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Hymn No. 2943 | Date: 18-Mar-2005
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तुम कहते हो तो करते हो, जायज है तुम्हारी हर बात,
तुम कहते हो तो करते हो, जायज है तुम्हारी हर बात,
जो दिखलाते हो, तुम्हारी हर बात में दम है।
परे से परे हो, फिर भी धरा पे रहते हो,
तुम्हारे वास्ते पलक बिछायें बैठा है तीनों लोकों का स्वामी।
क्या कहना तुम्हारे बारे मैं, जैसे सूरज को हो दीप दिखाना,
हम तो तेरी कृपा की है एक बूंद, जो जी उठे तेरी नजरों के पड़ते।
गुस्ताखी माफ करना, जो हंस हंसके कर देता हूँ तेरी चर्चा,
तेरी दया से, तेरे पास आके तेरे हो गये है हम।
न हमारी कोई औकात, न ही कोई ताकत,
हंसना हो या रोना, जिंदगी मैं तेरे सिवाय न कोई ठिकाना।
तेरे पर है सब कुछ, तू चाहे तो छूटे, तू चाहे तो जुड़ जाये,
तेरी दरियादिली को है गीतों मैं पिरोना, इसी किरदार को है जीना।


- डॉ.संतोष सिंह