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Hymn No. 2945 | Date: 29-Mar-2005
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दिल में है पुकार पल पल, हर रातों को है ख्वाब एक ही।
दिल में है पुकार पल पल, हर रातों को है ख्वाब एक ही।
मन करे मिन्नतें हजार, कि यादों के लम्हों से निकलके आ जाओ।
भुला भटका मारा हूँ अपने आपका, फिर भी संवरना चाहता हूँ प्यार मैं।
जन्मों जन्म के सैलाब से निकलके, बस चाहूँ होना हमेशा के वास्ते।
मानी नहीं कभी अपनों की बात, सही राह पे चलते फिसला बार बार।
दासता बड़ी नागवार है, फिर भी दिल में खूबसूरत तेरी तस्वीर है।
पल पल बुनता हूँ फसाना प्यार का तेरे, मन को पीछे पीछे ले जाना है तेरे।
न जाने माया की कैसी बयार है एक ही झोके में करे जो हलाल।
मन में लाखो मलाल हैं, अंखियों से निरंतर आँसुओं की धार है।
अंतर मैं संवेदनाओं का जाल है, जो गिरते सम्भाले ले जाये तेरी ओर।


- डॉ.संतोष सिंह