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Hymn No. 2947 | Date: 30-Mar-2005
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कब कौन सा सपना सच हो जाये, प्रभु तेरे सिवाय कोई जाने न।
कब कौन सा सपना सच हो जाये, प्रभु तेरे सिवाय कोई जाने न।
लेखा जोखा सब धरा का धरा रह जाये, जब तेरी कृपा बरस जाये।
कहने को कुछ भी कह सकते हो, होने न होने के कई कारण होते है।
पर कब किस बात पर तेरा दिल आ जाये, जो पलक झपकते बदल दे जिंदगी को।
तू है न जिम्मेदार किसी बात का पर आगाह करने से न चूके तू बारबार।
रब तेरे दिल मैं है समायी दुनिया सारी, दुनिया मैं है तस्वीर तेरी।
ताना बांना इतना जुड़ा है कि बंद खुली आँखो के सच मैं बहुत फर्क है।
पिट पिटाके हम बार बार तेरे पास आये, न जाने कितना कुछ तुझसे पा जाये।
होने को तो है सब कुछ वैसा, पर बदले को बदले पल पल मैं संसार सारा।


- डॉ.संतोष सिंह