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Hymn No. 2949 | Date: 01-Apr-2005
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प्यार है ढाई अक्षऱ का शब्द, क्या है कोई बिरला ही जाने।
प्यार है ढाई अक्षऱ का शब्द, क्या है कोई बिरला ही जाने।
प्यार क्यों होता है किसी रहनुमाँ शख्स से, कोई बिरला ही अहसास करे इसका।
नजर न आये नजरों से कभी, पर जब वार करे तो घाव गंभीर करे।
जो खोया प्यार वही पाया संसार मैं, बाकी तो लूटे हैं लूटते रहेगे।
प्यार की ठौर से जो बंधा वो पार पाया भवसागर से यों ही रमते।
रस्म टूटे है यहाँ, जिन्होंने प्यार किया तो बस वो प्यार करते है।
जिस्म की उम्र होती है, प्यार की उम्र न होती है कोई।
प्यार एक शब्द नही साम्राज्य है परमात्मा का, जिसके दायरे मैं है सारा जहां।
प्यार से पार नही है ज्ञान, जहाँ सच्चा प्यार है उसमें ही बसे ज्ञान।
प्यार सबसे सुखद अहसास है जो चखें वो न भूले कभी स्वाद इसका।


- डॉ.संतोष सिंह