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Hymn No. 2950 | Date: 04-Apr-2005
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दया पे तेरी है संसार सारा, माँ तो एक अदना सा इंसान हूँ।
दया पे तेरी है संसार सारा, माँ तो एक अदना सा इंसान हूँ।
तार दे या मार दे हाथों में है तेरे, चाहे किस्मत का नाम दे या कर्मों का अंजाम।
उबर जाऊँ तो हाथ है तेरा, बिखर जाऊँ तो किस्मत मेरी।
चाहू या न चाहू हालातों से है गुजरना, संवरना तो दया पे है तेरी।
होंगे जहाँ मैं, सूरमां बहुत से करते होंगे करते हुये खिदमत तेरी।
हम तो न है यहाँ के न वहां के, पर रहना चाहता हूँ पल पल साथ तेरे।
करते करते कब चूक जाऊँगा पता नहीं, तो खुदा क्या कहूं मैं तुझसे।
हर हालातों में जो रहा तेरा, ओर तेरी चाहतों को पूरा किया तो समझना ये है कृपा तेरी।
बंदा बड़ा भगवान समझे खुद को, जो मिला अनहोनी का साथ जो हाथ है तेरा।
उससे भी बड़ा मेहरबान समझता हो, जो तेरी कृपा से तेरे साथ जाऊंगा हर हमेशा के वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह