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Hymn No. 2952 | Date: 04-Apr-2005
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जाने को न जायेगा किसी का आधा अधूरा भटकते चले जायेगे जरूर।
जाने को न जायेगा किसी का आधा अधूरा भटकते चले जायेगे जरूर।
इस मतलबी दुनिया से मतलब का मारा अधमरा हो जायेगा जरूर।
कर्मों का बोया, किस्मत से फला, तेरे पास आके भी न टला, पर वो हो जाता है।
लायक न थे तेरे दहलीज पे कदम रखने के वास्ते, तेरी दया से पहुँचा पास तेरे।
तूने भी स्वीकारा पहली बार मैं हमको, जलते हृद्य को बुझाया अपने लबों से छुआ।
पता न था ऐसी क्या थी खता, चाहे अनचाहे हालातों से उबरना न आया नहीं सबक
रघुबर खुद तो खुद तेरी भी लाज ना रखी, जो अपने कर्मों की गाज तुझपे गिरायी सीख पाया।


- डॉ.संतोष सिंह