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Hymn No. 2955 | Date: 08-Apr-2005
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है नीली छतरी वाले है नीली छतरी वाले, पास रहते रहते दूर क्यों तुम जाओ।
है नीली छतरी वाले है नीली छतरी वाले, पास रहते रहते दूर क्यों तुम जाओ।
मिठ्ठे गीत सुनाते सुनाते क्यों चुप हो जा रहे हो, एक सुहाने ख्वाब को क्यों मिटा रहे हो।
तुम तो लौट जाओंगे अपने धाम को, मिलेगा तुमको प्यार खूब अपने राम से।
बलाये लेंगी तेरी तेरा ही स्वरूप, कोई परम् सद्गुरू बनके तो कोई सिध्द अंबे माँ के।
दूर जाके भी बरसायेगा आनंद की फुहार, पर चैन कैसे पायेगा ये झूठ तारे बिना।
बार बार पुकारूंगा चाहे दिन हो या रात, ख्वाबों ख्यॉलों में करुँगा तुझसे बात।
बचना है तुझे इस सबसे तो कर दे पागल मुझे अंतर के मौन भरे साम्राज्य में।
गुमसुम सा हो डबडबायी नजरों से खोजूंगा, तेरी तस्वीर को चाहूंगा खबर न हो तुझे।
मैं मूखानिंन्द मांगू तो क्या मांगू तुझसे, जब संजोना न आया तो पाया हुआ भी तो सदा गुमाया।
मौत के बाद आये चाहे कोई भी जीवन, भूलूंगा सब कुछ भूल न पाऊंगा तुझे तेरे नाम को ही गाऊँगा।


- डॉ.संतोष सिंह