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Hymn No. 2959 | Date: 24-Apr-2005
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कोई किसी से कम नहीं मेरे वास्ते अल्पा ओर इरा मैं रत्ती भर का फर्क नहीं।
कोई किसी से कम नहीं मेरे वास्ते अल्पा ओर इरा मैं रत्ती भर का फर्क नहीं।
दौर हो जिंदगी मैं कोई भी भुलाये न भूले, ये दोस्ती प्रभुने रची है किसीके तोड़े न टूटे।
एक जान दो तन है सच पूछो तो काकाजी के दिल की अनोखी धड़कन है।
ख्वाबों के देश से उतरी है धरा पे, दुःख दर्द से डूबे हुओ के लिये आनंदमय जीवन है।
मुस्कान जब है खिले तो जैसे धरा ने रूप बदला, हर ले सबके दुःखो को पल भर में।
करती है कहा काकाजी का सदा, इसी अदा पे खिंचे चले आये प्रभु अनजाने में।
सोचों से कहीं परे करे वो कुछ न कुछ ऐसा, जो बदले न जाने कितने लोगों की जिंदगी को।
ईश्वर के सारे स्वरूप हो जाते हैं साक्षात, जब गाये गीत वो परम प्रेम के।
मायने न है उनके लिये कुछ का, मायने है तो जीवन को प्रभु के अनुरूप बनके जीना
शब्दों की तो एक सीमा है, ओर ये सीमा से परे प्रभु की साक्षात मूर्ति है।


- डॉ.संतोष सिंह