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Hymn No. 2960 | Date: 28-Apr-2005
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जब तुम दिल की बात करते हो, तो प्यार को क्यों भूल जाते हो।
जब तुम दिल की बात करते हो, तो प्यार को क्यों भूल जाते हो।
आशिकी करते करते यार से तुम क्यों दूर हो जाते हो।
दौर हो जिंदगी का कोई, उतारे न उतरे प्यार का नशा।
चाहते हुये होता नहीं, सच पूछो तो ये अंजाम है जन्म जन्म का।
न जाने कितने कर्म किये, या किस कारण से है ये प्रभु कृपा।
वख्त बदल जाये बदले जमाना, बदलता नहीं प्रभु प्यार का तराना।
अपना कोई होता नही न कोई बेगाना, दिल धड़के प्यार के वास्ते।
रोके रुकता नही चाहे मौत हो खड़ी, जो रोकना चाहे बन जाये सौत वही।
अपने रौ मैं सदा बहते जाये, जो होते हैं दिल के सच्चे वो खोते जायें।
मजबूर है प्यार मैं, मजदूर न है किसीके, ये तो प्रेमी है खुदा के।


- डॉ.संतोष सिंह