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Hymn No. 2963 | Date: 06-Apr-2005
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मेरी तो आस बस तुझसे है, मेरी तो प्यास बस तुझसे है।
मेरी तो आस बस तुझसे है, मेरी तो प्यास बस तुझसे है।
तू चाहे तो पल पल तड़पाये, तू चाहे तो पल मैं प्यास बुझा जाये।
मेरा तो बस नाता तुझसे है, चाहे वो अब से हो या सदियों से।
तू चाहे तो तेरा बन जाऊँ, सदा के वास्ते, या फिर दूर कहीं चला जाऊं।
अपनों को तो सब हैं अपनाते, ओर मनमाफिक हो तो गले लगाते।
हम जैसों को कौन गले लगाये, जो चाहके बहुत कुछ पर करना पाये।
तेरी शान घटे हमारा नाम जुड़ने से, उससे पहले दूर चला जाऊंगा बहुत।
दुनिया के किसी कोने में रहते, तेरी यादों के सहारे कैसे भी जी लूंगा जिंदगी।
तेरे मुरीदों की राह का कांटा न बनना है, हम तो हैरान हैं हालातो से।
तेरी रजा न होगी तो उनको भी हैरान करेगे, गुमसुम होके जी लेंगे जिंदगी को।
- डॉ.संतोष सिंह
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इन अपनो की भीड़ में कौंन है अपना, ऐ मौला मैं तो देखूँ तेरा सपना।
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ये बात हंसी की है सही, जो सच है उसे झुठलाया जा सकता है कहीं।
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