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Hymn No. 2964 | Date: 07-May-2005
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ये बात हंसी की है सही, जो सच है उसे झुठलाया जा सकता है कहीं।
ये बात हंसी की है सही, जो सच है उसे झुठलाया जा सकता है कहीं।
गधा शेर की खाल ओढ़ के कहीं शेर बन सकता है नहीं, है बात...
राजा के कपड़े पहन नौकर, कहीं राजा बन सकता है नहीं, है बात...
किस्मत में जो न लिखा, फिर भी ख्वाब देखूँ तो हंसी उड़ाये है सब, बात...
वास्ता न कर्मों का हकीकत से, गिरूं तो लगे घाव दिल पे, पर बात है सही...
समझाया लाख रहबर ने, फितरत ज्यों की त्यों बदले न बदले है बात हंसी...
मन मसोस के रह जाऊँ या सर वपिट के थक जाऊँ जो नही तो नही है बात हंसी...
घोड़ो के संगत मैं रहके कही चाल बदलती है गधे की, है बात हंसी पर है...
चस्पाया बहुत कुछ तेरे नाम पे, फिर भी कुछ न पाया है बात सही...
दिल से दिल्लगी करते रहना बहुत अच्छा लगे मन को, कहीं तो है हम, है बात सही...


- डॉ.संतोष सिंह