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Hymn No. 2966 | Date: 08-Apr-2005
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माँ मानों तो एक शब्द है, पर झकझोर दे पल पल दिल को।
माँ मानों तो एक शब्द है, पर झकझोर दे पल पल दिल को।
उठे किसी कोने से, याद दिलाये खूबसूरत किसी सलोने चेहरे की।
रेगिस्तान के बियाबान में एक मिठ्ठी झील है, जो जीवन की जीत है।
सबसे अंतहीन समय की अंतिम छोर है, दिल का सबसे रूपहला जो दौर है।
न जाने कितने जन्मों की साध है, जिससे मिलते ही जीतूं सारे जग को आज।
उठ जाये राज न जाने कितने राज से, कर न सके कोई उसकी गाज।
जिसपे गिरी उसकी गाज, बचा न सके संसार में कोई जो शरण में आये अभय दान पाये।
दुष्टों को न मिटाके, दुष्टता को मिटाये, अपना बनाके अपने पास बसाये।
बात सीधी है पर है सच्ची, दुनिया के सारे के सारे है उसके प्यारे बच्चे ।
बिसर जाओ तुम बिसर न पाये, कल की छोड़ो आज अब अपना बनाये।


- डॉ.संतोष सिंह