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Hymn No. 2968 | Date: 07-May-2005
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तुम हो तो साथ, तो हो कहाँ, आ जाओ एक पल के लिये पास मेरे।
तुम हो तो साथ, तो हो कहाँ, आ जाओ एक पल के लिये पास मेरे।
चैन की बंसी जरूर बजाओ, मेरे अंन्तर्मन को भी तो पास बुलावो।
वास्ता मैं तुझको किसका दूं, तेरी रहमत के सिवाय न कुछ पास मेरे।
माना रखता नहीं हूँ हक, फिर भी तेरी ही दया से मिली है जिंदगी।
आते ही मुख मोड़ तू लेना, हिकारत भरी नजरो से सर से पांव तक देख लेना।
बंदा तर जायेगा, अंतर मैं दुबक के तेरे यादों मैं खो जायेगा।
न किस्मत के लिखे हुये को तेरी परम् कृपा से तेरा हो जायेगा।
माटी का टुकड़ा माटी में मिलने से पहले, मिलन के गीतों को गायेगा।


- डॉ.संतोष सिंह