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Hymn No. 2971 | Date: 12-May-2005
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जो टूट गया वो दिल कहां, वो तो बस है खिलौना जिसे था टूटना।
जो टूट गया वो दिल कहां, वो तो बस है खिलौना जिसे था टूटना।
जो रूठ गया वो साथ कहां वो तो है बचकाना उसे तो था छूटना।
परे है प्रभु प्रेम इन सबसे कही, वहाँ न कोई ख्वाब न कोई भांग।
तलाश रहती है सदा बस उसी की, इसी एक बात पे होता है वो फिदा।
राह मैं आये कैसे भी दौर, छूटती हो चाहे श्वास, छूटे न वो कभी।
हर हालात में तरस खाये वो हालात पे, न कभी अपने यार के प्यार पे।
दासता बनती बिगड़ती रहे, पर वख्त के संग नशा ओर तारी होता जाये।
चाहत के लिये आहत मन तड़प तड़प के हर पल उसी ओर बढ़ता जाये।
लड़े न वो किसी से, लड़ता है तो बस अपने आप से, प्रभु प्यार के वास्ते।
रास्ते का पत्थर देखे मदिर की मुर्ति की, पहुँच जाऊं जो कैसे भी करके पास।


- डॉ.संतोष सिंह