VIEW HYMN

Hymn No. 2972 | Date: 13-May-2005
Text Size
माफ करो मुझको यारो, मैं तो हो गया हूँ दीवाना।
माफ करो मुझको यारो, मैं तो हो गया हूँ दीवाना।
रहा न अब कोई मेरा ढिकाना, हो गया हूँ जो दीवाना।
कब कहा किसके दर पे गुजरे जीवन, में न जानूँ रें..।
जाना हो कहां, जाऊँ कहां, चाहते न रुक पाऊँ में।
आंखो के रहते अंधा हूँ, हर पल जो ख्वाबों में खोया हूँ।
अनवरत् यादों का दौर तारी रहे, अपलक आंखो से देखा करुँ।
अपने यार के आगे पीछे मनुहार करता फिरता हूँ, खुद पे जो हंसता हूँ।
मान जाये सब, माने न वो, न जाने क्या चाहे है वो।
कहाँ से लाऊँ या क्या कर दूँ, उसको न जाने क्या कर दूं।
छोडूंगा नहीं प्रयासो को, एक के बाद जो होंगे अनंत प्रयास।


- डॉ.संतोष सिंह