VIEW HYMN

Hymn No. 2973 | Date: 13-May-2005
Text Size
काका तुम चाहोगे तो तेरे पास आ जाऊंगा, आके तेरा हो जाऊंगा।
काका तुम चाहोगे तो तेरे पास आ जाऊंगा, आके तेरा हो जाऊंगा।
कहने को तो होंगे हम, पर होके न होंगे, जो तुझमें बदल जाऊंगा।
खो जाने को न होगा कुछ न बिछुड़ने का होगा डर, जो पल पल तू ही तू होगा।
निहारूंगा तुझको बैठके सामने तेरे, इधर उधर जहां कही निगाह पड़े तू ही तू होगा।
मजा तो तब आयेगा जब खुद को ढुँढूंगा तुझमें, तो तेरे ही रूप में पाऊंगा खुदको।
अनंत आनंद का हिलोर होगा, अखंड प्रकाश का जो तेरा स्वरूप होगा।
झिलमिल झिलमिल होगा तू, बिना कहे कहेगा तू, तेरी ही बाते गूजेंगी अनहद नाद बनके।
खेलेंगे खेल रोशनी का रोशन होके, न जाने कब किस रूप मैं तू प्रकटेगा।
अनवरत तेरा ये खेल जारी है।


- डॉ.संतोष सिंह