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Hymn No. 2975 | Date: 17-May-2005
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बचना किसे है... दुनिया वालों होय हो जाने आया हूँ प्रेम में।
बचना किसे है... दुनिया वालों होय हो जाने आया हूँ प्रेम में।
बड़ी बड़ी न है, एक आस का दीप जलाया है पिता की कृपा से।
किस्मत का लिखा पाया तो क्या पाया, जो न पाया तेरा चाहा।
मंजिल की परवाह किसे है, जो मजिल दूर तुझसे खड़ी हो।
जिंदा मिसाल बनने आया हूँ, जो तेरा कहा करने आया हूँ।
हंसते हुये चूमूंगा सलीब को, तब भी मौत छू न सकेगी मुझको।
हम तो है एक कठपुतली, जो थामे डोर तू खड़ा है सदा से।
कामयाबी तो कृपा की तेरी एक बूंद है, हम तो चरणों की तेरे धूल है।
किसने क्या खूब लिखा है, जब अल्लाह हो मेंहरबान तो गधा पहलवान।
कर गया जो कुछ तो नाम उसका देना, बाकी तो है सब मेरे कर्म।


- डॉ.संतोष सिंह