VIEW HYMN

Hymn No. 2976 | Date: 26-May-2005
Text Size
त्याग दे तू दुनिया को, त्यागे तुझे इससे पहले त्याग दे दुनिया को।
त्याग दे तू दुनिया को, त्यागे तुझे इससे पहले त्याग दे दुनिया को।
रहा न कभी कोई किसी का, पल पल बदलते दुनिया में बदले जिंदगी।
अपना हो या पराया, चाहे किसी को तुमने गले लगाया, छिन जाये उससे पहले त्याग दे।
चाहके भी रह न पाये, हाल वो समय कर जाये, खुद का मोह छोड़ दे।
कही कही है बात ये, फिर भी न जाने क्यों समझ पाऊँ, त्याग दे तू दुनिया को।
अनवरत चलता रहा है खेल, टूटे से न टूटे पर छूट जाये जो तू न त्याग।
कमोवश हाल है सबका एक जैसा, जो संसार मैं है या जो संसार से हैं भागे।
त्याग को भी तू त्याग दे, जो सारे मोह को तोड़के सबको तू अपना ले।
त्याग में छुपा है जीवन का मर्म, जो रमा इसमें तो जान पाये राज जीवन का।
त्याग दे तू त्याग को, हर त्याग से परे है रूप विशुध्द तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह