VIEW HYMN

Hymn No. 2977 | Date: 23-Jun-2005
Text Size
बातें हो प्रेम भरी, मुलाकात हो प्रेम भरी।
बातें हो प्रेम भरी, मुलाकात हो प्रेम भरी।
अंतहीन समय मैं अंत न हो कभी प्रेम का।
पल पल गुलजार हो जीवन का प्रेम से, न कोई सरोकार हो।
दिल की धड़कन गूंजे प्रेम से, मन थिरके प्रेम की धुन पे।
सोचा न हो वो सपने साकार हों तेरे प्रेम में।
पल पल यादगार हो जो, पल पल बीते तेरे प्यार में।
जमाने में तेरे सिवाय न कोई ओर साथीदार हो।
नश्वर जीवन मैं ईश्वर तेरा प्रेम स्वरूप मैं साथ हो।
पिता हो या माता, गुरू स्वरूप से हो प्रेम भरा नाता।
भाये न सिवाय उसके कुछ, जो है उससे प्रेम भरा नाता।


- डॉ.संतोष सिंह