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Hymn No. 2978 | Date: 24-Jun-2005
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चलो अच्छा है हम बन जाये वो जो थे कभी,
चलो अच्छा है हम बन जाये वो जो थे कभी,
बारिश का हो मौसम हम भीगे खुब सही।
यादों के झरोंखो से निहारू बचपन की दुनिया को,
जहां बस मस्ती का आलम हो, न मौसम की परवाह।
कौन अपना, कौन पराया, खेल खेल में गले सबको लगाया।
सूबह की मारा पीटी, तो शाम को उसीके घर मैं खाना खाया।
जो न जाना था, जो न सोंचा उसी रंग मैं रंगते गये,
कैसे कहूँ प्रभू जहाँ थे हम कभी वहाँ अब नहीं।
तुझे ढूंढ़ा तेरे साथ रह रहके, न जाने कहाँ कहाँ नहीं,
न जान पाये तेरे पास रहते कि तू है यहीं सदा से।


- डॉ.संतोष सिंह