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Hymn No. 2979 | Date: 01-Jul-2005
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जो करीब में तू होता है, तो दिल मैं मौज होता है।
जो करीब में तू होता है, तो दिल मैं मौज होता है।
बिना बात के ओठों पे मुस्कान, ओर जीवन अच्छा लगता है।
अपने आपमें होता हूं, जैसे खग आकाश में विचरता हैँ,
मिटती हुयी पहचान को भुलाये, तेरी यादों में जीता हूँ।
दुनिया में रहके, दुनिया से परे जो में तेरे करीब रहता हूँ।
अबोले शब्दों से प्रेम भरा तुझसे संवाद करता हूँ।
डूबते उतरते धीमे धीमे तेरे करीब पहुँचता हूँ।
अपनी सारी सीमाओं को तोड़ते तुझमें खो जाता हूँ।
मुकाम से दूर रहते हुये भी, खुद को मुकाम के पास पाता हूँ।
एक बार फिर से जिंदगी को जीने का अर्थ समझता हूँ।


- डॉ.संतोष सिंह