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Hymn No. 2983 | Date: 07-Jul-2005
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तुम कहो इसे ख्वाब तो भी मैं ना ना कहूंगा।
तुम कहो इसे ख्वाब तो भी मैं ना ना कहूंगा।
तुम कहो इसे जिंदगी तो भी मैं ना ना कहूंगा।
समझ समझ का फेर है, एक ही रूप के दो नाम है।
तुम देखों यहाँ से, तुम देखो वहां से, बस ये नजरों का फरेब है।
एक बार को जो लुटा, फिर भी न वो जिंदगी मैं डूबा।
खाके यहां पाया जाता है, हंसके यहां रोया जाता है।
सांच को आग कहा, बाकी तो जीवन में सब कुछ खाक है।
तिनका तिनका जोड़ हूआ जोडूँ मैं खुद को खुदी से।
रात को जो सोये दुनिया तो वो जिये हकीकत से भरी जिंदगी को।
समझना मुश्किल है प्यार जो समझ से परे जिंदगी है।


- डॉ.संतोष सिंह