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Hymn No. 2984 | Date: 08-Jul-2005
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ऐसे न दूर जाओ, पास आ आके हाथ न छुड़ाओं।
ऐसे न दूर जाओ, पास आ आके हाथ न छुड़ाओं।
जो हाथों में न हो तेरे, तो हम है कहीं किसके सहारे।
यों ही न आया था पास, कुछ तो है जो गले तूने लगाया।
रोना रोता नहीं कमियों का, याद करता हूँ तेरी मेहरबानी।
कद्र न कर सका, झूठे ही सही यादों की सौगात देता हूँ।
गाहे बगाहे ही सही, दिल ही दिल मैं तुझसे बात करता हूँ।
चुका नही हूँ, न ही चूकूंगा, तेरे रहते तेरे पास पहुँचूगा।
किसी से न है कोई शिकवा, एक रिश्ता है तेरी यादों का।
झाँकोगे जो नजरों में दिल को तरबतर पाओगे तेरे प्यार से।
अहसास है इतना मीठा तेरा वास रहेगा सदियों तक।


- डॉ.संतोष सिंह