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Hymn No. 2985 | Date: 08-Jul-2005
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ढूंढू ढूंढू तुझे, हर पल यहां वहां, जहां तहां, जाने कहां कहां ढूंढू तुझे।
ढूंढू ढूंढू तुझे, हर पल यहां वहां, जहां तहां, जाने कहां कहां ढूंढू तुझे।
जब होता हूँ अपने आप मैं, तो पल पल सताये तेरी याद रें ढूंढू...
बिना कुछ हुये रोता हूँ न जाने क्यों कब हंसता हूँ पर तुझे दिल ही दिल में संजोता हूँ। ढूंढू...
गाफिल हूँ दुनिया में दुनिया बनके, तेरी याद आते तेरा होता हूँ ढूंढू...
इक पल को चैन न लेना चाहूँ, तेरे ख्यालो मैं डूबा रहना चाहूँ ढूंढू...
खीचें हर बार कुछ ना कुछ, फिर भी पहुँचू पास तेरे ढूंढू...
सिहर जाता हूँ हालत देखके अपनी, एक के बाद न जाने कितनी मांग है मेरी फिर भी सबसे पहले है तू ढूंढू...
मिटता जा रहा हूँ धीरे धीरे, हर दिन जो तेरे प्यार मैं बनता जा रहा हूँ ढूंढू...
हैरान होता नहीं लोगों से, हैरान होता हूँ जो अपने आप से फिर भी ढूंढू, ढूंढू, तुझे...
एक अदद नजर भर के वास्ते ढूँढता हूँ, जो बदल जाये जन्म जन्म के मिलाप में ढूंढू...


- डॉ.संतोष सिंह