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Hymn No. 2986 | Date: 18-Jul-2005
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धीमें धीमें जो मिटता जाऊँ, रह रहके तुझमें बदलता जाऊँ।
धीमें धीमें जो मिटता जाऊँ, रह रहके तुझमें बदलता जाऊँ।
ये कैसे होता है ये क्यों होता है, सारे सवालों से परे तेरा होता जाऊँ।
लगा है ये रोग कैसा, जिससे न उबरना चाहूँ पर हाँ अब इसीमैं रहना चाहूं।
डर न लगे अब कातिल जमाने से, जो कत्ल हुआ तेरे फरमान से।
लिखी हुयी को छोड़ तेरे पीछे पीछे दीवानगी कहो या परवानगी हम तो आयेगे।
जग गया है एक आस का दिया, जो लपलपाये आंधीयों के दौरान पर बुझने न पाये तेरे प्यार से।
ख़ाकसार ख़ाक तो है पहले से, नवजीवन मिला है प्रियतम तेरे पास आके।
लानत है जो रश्क करुँ तेरी दानत पे, तेरी दानत पे जो टिका है मेरा अस्तित्व।
चलते हुये को गिरते देखा, प्रभु तेरी कृपा से गिरे हुये वो तेरे पास पहुँचते देखा।
जो अब तक न हुआ वो आज होगा, कल का भुला हूआ आज पहुँचेगा।


- डॉ.संतोष सिंह