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Hymn No. 295 | Date: 21-Aug-1998
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अलबेला है मेरा प्यारा पिता जानता है सबकुछ बनता बड़ा भोला – भाला ।
अलबेला है मेरा प्यारा पिता जानता है सबकुछ बनता बड़ा भोला – भाला ।
हर तरह के कर्मों से था नाता हमारा जानते हुये भी स्थान दिया अपने चरणों में ।
उसके पास जाके रोना अपना रोते है, रो रोके उसको खूब सताते है ।
दूसरों की कमीयों को गिनातें है, अपनी कमियों को भूल जाते है ।
जो सब कुछ जाने उसको अपने मुताबिक सब कुछ समझाते है हम ।
हमारी बातें हँसके टाल जाता, फिर हमको दूर रहना सीखाता अपनी कमियों से ।
उसकी उदारता देख – देखके, भीतर – ही भीतर रो पड़ता था मैं ।
रोने से पथ भूलते नहीं, चलना पड़ता है कठिन पथ पे ।
एक से एक देखा, खुद सा गया बीता ना देखा, जो दूसरों में पाप ढूंडे सदा ।
वादे कई - कई किये मैंने हर वादे को तोड़ा – मरोड़ा अपने सुख चैन के वास्ते ।
दुखो का फोडा जब बदन पे निकला तो उसको याद करते हुये फरियाद करते है हम ।
उदार है वो कीतना फिर भी शरण देता है अपने श्री चरणों में ।
- डॉ.संतोष सिंह
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