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My Divine Blessing
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Hymn No. 3006 | Date: 21-Oct-2005
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सबसे बातें करते हुये, तुझसे बात करता हूँ।
सबसे बातें करते हुये, तुझसे बात करता हूँ।
सबको देखते हुये, तुझको ही मैं देखता हूँ।
खोये खोये रहते हुये, तुझको ही याद मैं करता हूँ।
तुझसे दूर रहते हुये, तुझको ही करीब पाता हूँ।
चलते चलते कहीं ओर, तेरे पास पहुँच जाता हूँ।
अनजाने कहो या जाने, तेरे प्यार को जीता हूँ।
रीता रहा हूँ सदियों से, अब तेरे प्यार को पीता हूँ।
जवाब तू दे या न दे सवाल तुझसे ही करता हूँ।
फिर मौन होके जो तुझे देंखू तुझे पास ही पाता हूँ।
एक सिहरन सी दोड़े जो फिर तुझमें ही खो जाता हूँ।
- डॉ.संतोष सिंह
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टूटे हुये शब्द है, भग्न हृद्य है, सुबह हो या शाम पुकारूँ जो तुझे।
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