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Hymn No. 3008 | Date: 25-Oct-2005
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आ जाओ, आ जाओ.., आके दिल की प्यार बुझा जाओ।
आ जाओ, आ जाओ.., आके दिल की प्यार बुझा जाओ।
तड़पत है मन मोरा, धड़कत है जो दिल बस अब तेरे वास्ते।
ये कोरे शब्द नही, न ही करुँ कागद काले यों ही, यों ही।
खो जाता हूँ जो तेरी यादों मैं, हर आहट पे निगाह उठे कहीं तू तो नहीं।
टूटने को टूटे सब कुछ, तोड़ने पे भी ना टूटें बंधी है जो आस तुझसे।
खुशियाँ अब खुशियाँ न दे, दुःख में दुःख न लगे मुझको।
तेरे सिवाय इस जमाने में कोई न लगे अंपना चाहे हो कोई कितना सगा।
न जाने ये कैसा है विश्वास, जिसकी नोक पे खड़ा हैं तेरा दास।
शिद्दत से करता हूँ इंतजार, आज के आज जो हो जाऊंगा तेरा।
रोके रुकने वाला नहीं, किस्मत ओर कर्म भी झुकेंगे प्यार के आगे मेरे।


- डॉ.संतोष सिंह