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Hymn No. 297 | Date: 22-Aug-1998
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इंतजार है मुझे जब हम तेरे पहलू ये समाँ जायेगे,
इंतजार है मुझे जब हम तेरे पहलू ये समाँ जायेगे,
है तो ये बड़ी बात नहीं पर आज नहीं तो कल सबका यही होना है ।
वहाँ न पाने का अहसास है न खोने का, बस घुल मिल जान है ।
वैसे ही जैसे आकाश – आकाश में है मिल जाता आपस में ।
शुरूआत शून्य से हुई थी, शून्य में लोट के आना है सबको;
बाकी तो सब कुछ एक या कई - कई है ।
बुलाता है वो सदा पास अपने, हम नहीं नजर अंदाज करते है उसको;
जहाँ – तहाँ मारे – मारे फिरके उसके पास आना चाहते है ।
पाना चाहते है संसार को और उसको त्रिशंकू की तरह अधर में है लटकते;
नियम है जगत का, एक को पाने के लिये दूजे को पड़ता है खोना ।
निर्णय तो लेना पड़ेगा खुदही खुदके लिये;
आज नहीं तो कल उस दर पे जाने के लिये इस दर को पड़ेगा छोडना ।


- डॉ.संतोष सिंह