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Hymn No. 3016 | Date: 25-Jun-2005
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बात दुनिया की क्या करुँ, बात जो न हो मेरे दिल की।
बात दुनिया की क्या करुँ, बात जो न हो मेरे दिल की।
साथ दुनिया का हो तो क्या करुँ, जो साथ न हो मेरे दिलदार का।
गुजरने को गुजर जायेंगे हम, पर अब तुझको न भूल पाऊंगा।
दीया है बहुत सी सौगात तूने जिंदगी में, तेरे नाम पे इस बार मर जायेगे।
दूर तुझसे जाके जी न सकूंगा, पास तेरे बिन आये दम न लूंगा।
कहने को तो बहुत कुछ बदला है, पर खुदको तुझमें बदल जाऊंगा।
व्यथा है जिंदगी में बहुत पुरानी, प्यार के नाम पे किया हूँ जो मनमानी।
लगता नहीं है दिल कुछ में, जो गुजरे दौर की बन गयी निशानी।
फरमान जो भी सुनाना मेरी जिंदगी का, आखिर दम लूंगा गोद मैं तेरी।
जर्रे जर्रे को थरथरा दूंगा, अपनी करुँणा भरी पुकार से तुझको पास बुला लूंगा।


- डॉ.संतोष सिंह