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Hymn No. 3018 | Date: 09-Dec-2005
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दीवाना कौन, परवाना कौन, न जानूँ प्यार क्या होता है।
दीवाना कौन, परवाना कौन, न जानूँ प्यार क्या होता है।
पल पल तुझसे दूर रहके तड़पता हूँ, तुझे ही हर पल चाहता हूँ।
मिले थे तो न सोचा था, मिलन की घड़ियों के बाद, पड़ता है बिछुड़ना।
ये कैसी है तकदीर मेरी, तेरा होके कैसे अब तक दूर हूँ मैं।
ख्वाब क्यों होते है देखने के वास्ते, क्यों नही होते हैं सच्चे।
बदल रही है हर पल दुनिया, तेरे अनुरुप क्यों न बदल पाऊँ मैं।
मेरा बदलना क्यों नही रास आये तुझको, पास रहके रहता हूँ क्यों दूर तुझसे।
क्या किसी भी खत्ता की होती है इतनी बेदर्द सजा।
अगर तुझे आता है इसमें मजा तो देना सजा, पर साथ साथ रहना सदा।
होने को जो भी हो हँसता रहूँगा साथ तेरे, अब तो ख्वाब में भी सोच न सकूं तुझसे दूर जाने को।
- डॉ.संतोष सिंह
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जो कहना है वो करना है, जीवन मैं तेरी ओर बढ़ना है।
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घूंट भरके वास्ते तरसता हूँ, तुझसे ही मिन्नते करता हूँ।
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