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Hymn No. 3019 | Date: 09-Dec-2005
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घूंट भरके वास्ते तरसता हूँ, तुझसे ही मिन्नते करता हूँ।
घूंट भरके वास्ते तरसता हूँ, तुझसे ही मिन्नते करता हूँ।
छलकते जाम को देखके मचलता हूँ, जो तुझसे ही प्यार करता हूं।
तेरा प्यार है पैमाना मेरे वास्ते, धड़कते दिल से जो सजदा करता हूँ।
सुकून पाऊं चूर होके तुझमें, तड़पता हूँ जो बूंद बूंद के वास्ते।
सूखे लब्ज फड़क उठते हैं, तेरी यादों को नज्मों में पीरानें वास्ते।
अनजाने में तेरे प्यार का एक ओर पैमाना पीने के वास्ते।
पीना का बहाना होगा कई कइयों का, हम तो पीये तेरा होने के वास्ते।
रोज रोज चलता हूँ, कहीं और न जाने कब कैसे पहुँचता हूँ तेरे दर पे।
बड़ी मुश्किल होती है, तब बड़ी मुश्किलों से जो मिलता हूँ तुझसे।
पीने ओर पिलाने के सिलसिले के बाद क्यों रुखसत होना पड़ता है तुझसे।


- डॉ.संतोष सिंह