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Hymn No. 3025 | Date: 07-Feb-2006
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ना रे ना, ना - ना, होगा कुछ अब ऐसा पड़ेगा दूर तुझसे होना।
कोई रह रहके दिल को गुदगुदाये, भीड़ में भी चुपके से छेड़ जाये।
नजर रहे कहीं भी, नजर के आगे उसकी ही तस्वीर आये।
सिहरन सी दौड़ती है, जब जब प्यार में उसके खो जाऊँ।
जीवन की दुर्गम राहों पे, मस्त रहने का अंदाज वो सिखलाये।
यों ही गुजरती जिंदगी को, मकसद के वास्ते जीना बतलाये।
बिना कुछ कहे न जाने कितना कुछ दे जाये, अनजान बनके वो दिखलाये।
पाने को पाऊंगा सब कुछ तेरी कृपा से, पर तेरे बिना कैसे जी पाऊंगा।
रहने को होगा पास मेरे सब कुछ, पर तू जो न होगा तो मतलब नही जिंदगी का।
में कोई पूर्ण ज्ञानी नहीं, पर मस्ती मैं रमना चाहूँ प्यार मैं खोके।
साधारण में भी हूँ, साधारण जो चाहता है तेरी चाहत को अपनाना।
न ही मुक्ति का हूँ, दीवाना, न ही किसी विशिष्ट शक्ति को है पाना।
प्यार भरी दुनिया से आया हूँ, गांना चाहूँ प्यार भरा तराना हर दम।


- डॉ.संतोष सिंह