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Hymn No. 3026 | Date: 10-Feb-2006
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एक बार नहीं, कई बार सोचा, कर दूँ कुछ ऐसा कि हो जाये तू मेरा।
एक बार नहीं, कई बार सोचा, कर दूँ कुछ ऐसा कि हो जाये तू मेरा।
जब करने का वख्त आया, तो करने का हौंसला ही न खुद में पाया।
आसमा अंतहीन है, पंख में दम भी है, पर भरोसा खुद पे जो नहीं है।
जमी चारों ओर है, चलना कैसे होवे, जो खड़ा होने से डरता रहूँ सारी उम्र।
ख्यालों ख्वाबों से उबरना न आया, तो कैसे करना मन को सुहाये।
बिना दोड़े कोई जीता नहीं है, जो जिंदगी इक लंबी रेस हो।
जानने को जाना है बहुत कुछ, पर उसे साध न पाया हूँ अब तक।
वख्त बैठे बैठे आता नहीं है, जो कदम उठे तो वख्त वो सही है।
कर्मों के धार से कटते है कर्म, है वो कहावत सही लोहे को लोहा ही काटे।
बीतने को बीत जायेगा सब, रब अब ये सुनहरा मौका हाथ आनेवाला नहीं।


- डॉ.संतोष सिंह