VIEW HYMN

Hymn No. 299 | Date: 23-Aug-1998
Text Size
सुनाने को कुछ नहीं है मेरे पास, बस मुझे तुझसे है सुनना ।
सुनाने को कुछ नहीं है मेरे पास, बस मुझे तुझसे है सुनना ।
मेरे पास कुछ ना है जो साथ जा सके तेरे पास, तेरे नाम के सिवाय ।
आता जाता कुछ भी नहीं मैं मूर्ख पल दो पल के लिये ले लेता हूँ तेरा नाम ।
पापियों के जमात का हूँ मुखिया मैं, मुझसे बड़ा कोई पापी नहीं, इस जहाँ में ।
आलस्य का हूँ स्वामी, नाम लेने तेरा बैठूँ तो मन को कोई न कोई बहाना याद आयें ।
तेरी कृपा से दो - चार पंक्ति लिख लेता हूँ, मिमियाते हुये मैं – मैं करता हूँ ।
उपदेश देता हूँ बहूतेरे मैं जीवन को ढाल नहीं पाता उसपे ।
खजाना है मेरे पास 'मैं’ के अज्ञान का, ढोता हूँ अपने सर पे सदा उसे ।
शरमा जाये खल कामी भी, मुझसे बडा कोई दुराचारी नहीं ।
तेरी गुलामी करने को हूं तैयार मैं सदा, पर मेरा 'मैं’ आड़े आता सदा ।


- डॉ.संतोष सिंह