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Hymn No. 300 | Date: 23-Aug-1998
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आज ये राज तू मुझे बता दे, क्यों उतरा है तू इस धरा पे ।
आज ये राज तू मुझे बता दे, क्यों उतरा है तू इस धरा पे ।
जहाँ सिर्फ ’मैं-मैं' का राज है, उस मैं – मैं को तू क्यों ललकारने निकला है।
सारे आकाश के स्वामी क्या तू भी है बेचैन ’मैं' के लिये।
हम तो खुद ही सतायें हुये है, तू क्यों उपहास उड़ाता है हमारा ।
काबिल नहीं हम तेरे, काबिल तू बना सकता है हमें ।
कहते हैं हम भी सचमुच का, दोष है सबका सब हमारा ।
पर तेरी दया के अधिकारी है हम, पास आने को तेरे रखते है हक हम ।
दोजख में कई - कई बार गये हम, फिर भी ना सुधरें ।
जब आया है तू इस जहाँ में, पल दो पल के लिये पास रख ले हमें अपने।
कृपा कर तू हमपे इतनी, शायद तर जाये हम ।


- डॉ.संतोष सिंह