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Hymn No. 301 | Date: 24-Aug-1998
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मत रोक अपने आपको, तू इतना बहना पड़ेगा उसकी ओर एक ना एक दिन ।
मत रोक अपने आपको, तू इतना बहना पड़ेगा उसकी ओर एक ना एक दिन ।
छोड दे सारे मोह को, आज नहीं तो कल सब के सब बीत जाने वाले है ।
पीछे से पछताने से अच्छा कुछ करके दिखाना, उसको अपना बनाना ।
मिलने या न मिलने के फेरे में ना पड़ तू ये जान लें वो संग है तेरे सदा ।
अपने आपको पहचानना पड़ेगा, आज नहीं तो कल सब छोड जान पड़ेगा ।
प्यार तो सबसे करना पड़ेगा, खुद को खुदसे मुक्त करने के लिये लडना पड़ेगा ।
सत्य को कब तक टालेगा तू, सत्य तो सदा सत्य रहेगा उसे सदा स्वीकारना पड़ेगा ।
जब तेरी ठोर उसकी हाथों में है, तो मत खींच तू इतना की टूट जाये ।
जुडना कीसी से है बहुत कठिन, टूटना तो एक पल में है टूट जाता ।
अपना मान लेना बहुत सरल है, पर उसे अपना बनाना बहुत ही कठिन ।
डगर को सब है पहचानते, पर उसपे चलके मंजिल तक पहुँचना बहुत ही कठिन है।
तुझे तो साथ मिला है कीसीका, निश्चिंत होके तू अपने आपको सौंप दे इसे।


- डॉ.संतोष सिंह