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Hymn No. 309 | Date: 27-Aug-1998
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तूझें क्या दे दें सकते है हम, जो भी देंगे वो तो नाशवान होगा ।
तूझें क्या दे दें सकते है हम, जो भी देंगे वो तो नाशवान होगा ।
और तू कृपालू है कीतना, देता है हमें अपना अमूल्य अमिट सान्निध्य।
मैं डरता हूँ बरबस रो पड़ता हूँ अपनी छाया से भी तूझे बचाना चाहता ।
कहीं से भी तेरे लायक नहीं में, मुझे जैसे के लिये शब्द नहीं ।
डाल दें तू मुझे तेरे नरक में अनंत काल तक के लिये,
जयजयकार होगी सब ओर से, इतना आक्रांत है सब मूझसे ।
फिर जितनें सतायेंगे पाप मुझे मेरे उतना ही याद आयेंगा तू मुझे ।
लायक तो नहीं हम तेरे कृपा कें, रहे तेरे नाम का स्मरण सदा मुझे ।


- डॉ.संतोष सिंह