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Hymn No. 311 | Date: 28-Aug-1998
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ऐं शहंशाओं के शंहशाह, अनंत ब्रह्माण्ड के राजाधिराज,
ऐं शहंशाओं के शंहशाह, अनंत ब्रह्माण्ड के राजाधिराज,
अजन्मा, अनंत, महायोगेश्वर, सब भूतों में तू करें निवास ।
तेरे बिन कुछ भी नहीं, तू ही ता है सब कूछ, फिर भी कूछ नहीं;
न दावा करता होनें का, मालिक तू सर्वदा से हम सबका मदद है करता ।
एक से एक आयें चलें गये संजोया सपना संसार को जीतने का;
हाथ धोना पड़ा अपनी जिंदगी से तेरे आगे कीसीकी ना चली ।
प्यार जिसने तुझको किया, जीता सबके दिलों को, मतवाला बनकें वो झूमा;
सबको सूमाया, लुटा ना कीसी को लोगों ने खुद ही उसपे खुदको लुटाया ।
तेरे आगे कोई कुछ भी नहीं, विद्वान हो या सम्राट, अपने – अपने विष्यों
के माहीर, खुद को तेरे हवाले जिसनें किया, उसका तू सहारा बना ।
हर पल रखा जिसनें तेरा ख्याल, उसका करें तू ख्याल, तेरी शरण में जो
आया, उसकी पूरी की तूने हर इक् साथ, हर आश का तूने किया ख्याल ।
नजरेतून आयें तो क्या से, हर इक् पे है तेरी नजर, जो खबर हमको
ना रहती है उसकी भी खबर तू है रखता, तुझको तो है सब पता ।
तू है अपरंपार प्रभु, तेरी महिमा अपंरपार, तेरे इस महान सृष्टि के
क्षुद्र जीव है हम, दुस्साहस करते है तेरा पुत्र बननें के लिये, हमें तो बस तेरा स्मरण चाहियें।


- डॉ.संतोष सिंह