VIEW HYMN

Hymn No. 312 | Date: 28-Aug-1998
Text Size
मदद, मदद के लिये प्रभू सदा हम तेरी गुहार लगातें है ।
मदद, मदद के लिये प्रभू सदा हम तेरी गुहार लगातें है ।
अपने आप से अपने कर्मों के आगे हथियार ढालके चिल्लातें है । (मदद के लिये)
तूने ज्ञान, प्रेम, बुध्दि मन यें हथियार दिया हमें खुदको खुदसे जीतनें के लिये ।
न जीत के खूद को इनकें वश में होके, घोर कर्म किया हमनें फिर पुकारा तुझको मदद – मदद के लिये।
तू दयालू सबसे बडा, कृपा किया हमपे सदा, तौबा किया हमनें कई बार, फिर उस तौबा से नाता जोडा।
प्रिय पिता हार जाते हें हम एक बार नहीं कई बार खुद से ।
हम हारना चाहते है तुझसे खुदको, आजीवन तेरी शरण में रहना चाहते है ।
मन की काई बात ना है मुझे सुननी, तेरी हर बात को मन में याद करना है मूझे ।
पड़ेगा जुझना चाहें कीसी से जुंझ लुंगा मैं तेरा नाम लेकें पर रहूंगा सदा तेरे संग ।
में एक – एक अंग है तेरा, तुझसे अलग है तो क्या से, तेरे सिवाय कूछ भी ना है मेरा ।


- डॉ.संतोष सिंह