My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 314 | Date: 29-Aug-1998
Text Size
झन्म लेते ही नाता टूट जाता है तूझसें, जकड जाते है श्वासों के फेरे में
झन्म लेते ही नाता टूट जाता है तूझसें, जकड जाते है श्वासों के फेरे में
अपने परायें का भेद उभर आता है, मन के संग मचलते हें हम ।
तन के हर बंधन में बंधते ही जन्म लेतें है हर रिश्तें नातें ।
विशालता अपने आप हो जाती है खत्म, क्षुद्रता का होता है जन्म ।
भरण – पोषण करत है, इच्दाओं और स्वारथ की वही मांग तुझसे है दोहरातें ।
खूद को भूलें रहतें है, यहाँ – वहाँ मिथक भरें मान्यताओं का पूजतें है ।
असत्य की पट्टी होती है आंखो पे, असफलता हाथ आतें ही दोष देते है तूझे ।
विश्वास देखनें के लिये रहतें है बैचेन, तेरे पास पहुंचने को क्यों नही करिश्मा समझाते ।
बांध लेते है खुदको मांगो में, भाग तुझसे करत रहते है ।
अगर मरना – जीना सत्य है, तू तो परम् सत्य है ।
स्वीकार कर इसे क्यों नहीं खूद को तेरे सहारे हं छोडे देतें।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
दिल की गली में हें खलबली, चर्चा चली है बस तेरी ही तेरी ।
Next
ऐं मेरे प्यारें पिता जो मजा तेरी वंदना में है वो कहीं और नहीं,
*
*