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Hymn No. 315 | Date: 29-Aug-1998
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ऐं मेरे प्यारें पिता जो मजा तेरी वंदना में है वो कहीं और नहीं,
ऐं मेरे प्यारें पिता जो मजा तेरी वंदना में है वो कहीं और नहीं,
फीका है सब कुद तेरे सामनें चाहें वो सुख हो या दुःख।
दर्द भी बेबस हो जाता है, जब रहते है हम तेरे आनंद में;
कोई और क्या दें देगा मुझे, क्या छीन लेगा मुझसे, मेरा कर्ता - धर्ता तो तू है।
भेद नहीं कर पाता हूँ मैं कीसी और में और तुझमें जब रहता हूँ डूबा तेरे ख्याल में।
मन कीतना भी हो चंचल, जब तेरे नाम का हो जाता है संग तो उससे स्थिर कोई नहीं।
कीतनी बार आयें – गये, कीतनी बार आयेंगे, पायेंगे, परवाह कीसे है बस रहे अहसास तेरा।
तेरा साथ सा कोई साथ ना है जो है भी वो छूट जाता हं ।
प्यार किया दुनिया से तो क्याँ किया, वो भी आज है तो कल नहीं ।
सबसे खरा तेरा बंधन है सब टूट जाये पर वो ना है टूटता ।


- डॉ.संतोष सिंह