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Hymn No. 320 | Date: 31-Aug-1998
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संगत तेरी कुछ ऐसी है, रंग गये हम तेरे रंगत में।
संगत तेरी कुछ ऐसी है, रंग गये हम तेरे रंगत में।
दंग रह गये देखकें हम, चड गया जो प्यार का रंग हमपे ।
भूला में पहचान अपनी, देखके खुद को रूप में तेरे ।
सुना था बहुत बार, देखां तेरे करीब आके पहली बार।
हर बार गया था खाली, तेरे प्रेम भरे तीर का शिकार हो गया।
खामोशी से हर दर्द सहतें हुये दिल को तुझसे प्यार हो गया।
चढा है नशा प्यार का हमपे पहली बार भूला चुका हूँ सब कुछ मैं।
होश में न आना है, बाहर भीतर से तेरा हो जान है।
कसूर ना है कूछ मेरा, दोष क्यों देनें लगा कोई तुझको।
प्यार में हाल सब का बूरा होता है, फिर भी हर कोई शिकार होना चाहता है तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह