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Hymn No. 322 | Date: 01-Sep-1998
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हींग जगे ना फिटकरी मेरा सद्गुरू हें सबसे चोखा, अनोखा,
हींग जगे ना फिटकरी मेरा सद्गुरू हें सबसे चोखा, अनोखा,
कई - कई गुरू है इस संसार में, जो अपने शिष्यों के सर पे गुरू है।
मेरा गुरू तो कमल के फूल समां, हम जैसे कीतनें भौरों को पाले – पोसे,
लूटाता रहता है खूद को सदा, पर उसकी महक कम ना होती कभी ।
अपने पहलु में सुलाता है हमें, तूम के अंधेरों से दूर रखें सदा;
दामन फैला देता है, ज्ञान की पहली कीरन में नहलाता है हमें ।
प्रेम उनका हमपे इतना, खुद तो रहता है दुनिया भर के कीचड में,
उलटे – सूलटे दुनिया के रस्मों से बचाकें अपने आनंद के रसों का पान कराता है,
दीया ही दीया उसनें सबका, लीया ना कूछ कीसी से कभी।
वो गुणों का खान है फिर भी निर्मल निलीप्त है सबसे;
हमकों बना लेता है अपना, बनाकें समां लेता है अपने में ।
- डॉ.संतोष सिंह
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