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Hymn No. 325 | Date: 02-Sep-1998
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प्यार ही प्यार है हमें तुझसे, प्यार के शिवाय् कुछ भी नहीं,
प्यार ही प्यार है हमें तुझसे, प्यार के शिवाय् कुछ भी नहीं,
प्यार करता रहूँ हर पल तुझसे, तेरी फटकार को भी प्यार ही समझूं।
जो भी रिश्ता रहे तेरे – मेरे बीच में, बस प्यार भरा रहे;
तेरी तस्वीर हो या नैनों में छवी तेरी, हर पल उसे प्यार करना चाहते है हम।
खूद को लुटाकें बाल – बाकाँ भी ना होनें दू तेरा वक्त पड़ने पे;
मानता हूँ तू सर्व सक्षम् है बहुत, तूझे जरूरत ना हें हमारी।
हमारा प्यार एकतरफा ही सही, पर तुझसे प्यार करूंगा जरूर,
सहारा ना चाहीयें कीसीका, प्यार भरी तेरी यादों का सहारा है बहुत।
एकरार तू कर या न कर, हम तुझसे प्यार करतें रहेगे जरूर;
प्यार की आग में हर पल लूंगा, उसकी रोशनी में तूझे देखूंगा।
प्यार की आग बुझायें ना बुझेंगी दिन – प्रतिदिन बडती जायेगी तेरे प्रति;
होम कर दूंगा खूद को और सब कुछ तेरे प्यार में ।
हम झूम – झूमकें इजहार करेंगे, एक बार नेंही कई बार खुदका होम कर देंगे।
बस प्यार ही प्यार करता रहूंगा तुझसे, चाहें सहना पड़े कुछ भी।


- डॉ.संतोष सिंह