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Hymn No. 327 | Date: 02-Sep-1998
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बहुत बार तूने मौंका दिया, हर बार हम चूक गये।
बहुत बार तूने मौंका दिया, हर बार हम चूक गये।
तेरी हर परीक्षा में असफल हुये, निराश खुद हुये तूझे करने की कोशीश कीये।
तेरी कसौटी पे ना उतरें खरें, दूनियादारी में उलझ गये,
चाहा था क्या तूने हमसें, उस चाहत को पूरी ना कर सके हम।
शबसे कमजोर निकला ये पुतला तेरा हर विश्वास को तोड़ा तेरा
छोड ना का मन के साथ को, मन के साथ दौडा सदा।
बहुत यत्न किया, हर बार प्रयत्न किया;
पर समझा ना सका अपने आप को; तेरे साथ रहके बेसहारा रहा।
जी तेरे पास रहके पा न सका में इसका कोई मिला ना है मुझे;
अब तो गुजांर दूंगा इस जीवन को, तेरे ख्यालों के संग ।


- डॉ.संतोष सिंह