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Hymn No. 329 | Date: 03-Sep-1998
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मेरे प्रभु तेरे कई रूप, कई नाम, हर जन्म की अपनी इक् नई कथा।
मेरे प्रभु तेरे कई रूप, कई नाम, हर जन्म की अपनी इक् नई कथा।
अवतरित हुआ तू कई - कई बार, हर बार इक् नयें राह का निर्माण किया।
शेटा हो या बडा सबको सम्मान दिया, अधर्मीयों का तूने संहार किया।
प्यार से जग जीतना सीखाया, वक्त पड़नें पे हाथों में हथियार उठाके लडना सीखाया।
बंधा ना तू कभी कीसी से, न बांधा कीसीको, मुक्त रहके आनंद में विचरना सीखाया।
सबकें समान रूप धरा, रहा पर सबसे अलग, हैरत में पड़े इस जग को एक राह और दिखाया।
जाननें की कोशीश की जिन्हेंने उनके तू हाथ न आया, प्रेम से बांधा तूझे प्रेमीयों।
तेरी हर बात सबसे जुदा – जुदा है जो पहचानतें है तुझको वें तूझपे फिदा – फिदा है ।
हर युग के विष को तूने पीया हसंते हुये, दर्द अपनी जुबां पे न आनें दिया।
लीया ना तूने कभी कुछ कीसीसे, अर्पित किया हमनें तुझको दिया हुआ तेरा।
- डॉ.संतोष सिंह
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